April 3, 2025

शिवसेना की कमान अब नहीं रही ठाकरे परिवार के हाथ

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शिव सेना की कमान अब एक नाथ शिंदे के हाथ चली गई है। अब शिंदे गुट, शिव सेना का तीर कमान चलाएगा। चुनाव आयोग के बड़े फैसले के बाद महाराष्ट् में अब नई तरह की राजनीति दिखेगी।

चुनाव आयोग ने शिवसेना के दो गुटों में जारी पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न की लड़ाई पर फैसला सुना दिया है। आयोग ने पार्टी का नाम और चुनाव निशान शिंदे गुट को दे दिया है। आयोग ने 78 पेज के आदेश में पूरे विवाद के बारे में विस्तार में बताते हुए कहा कि शिंदे गुट के पास ज्यादा समर्थन है।

चुनाव आयोग ने 1968 का इलेक्शन सिंबल्स (रिजर्वेशन एंड अलॉटमेंट) ऑर्डर चुनाव आयोग को किसी पार्टी के चुनाव चिह्न पर फैसला लेने की छूट देता है। चुनाव चिह्न किसे मिलेगा, इसका फैसला करने के लिए निर्वाचन आयोग पूरी तरह स्वतंत्र है।

निर्वाचन आयोग ने कहा कि एकनाथ शिंदे की पार्टी द्वारा चुनाव चिह्न तीर और कमान बरकरार रखा जाएगा। गौरतलब है कि शिवसेना के दोनों धड़े (एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे) पिछले साल शिंदे (महाराष्ट्र के वर्तमान मुख्यमंत्री) द्वारा ठाकरे के खिलाफ विद्रोह करने के बाद से पार्टी के तीर-कमान के चुनाव चिह्न के लिए लड़ रहे हैं।आयोग ने ये भी कहा कि शिवसेना का मौजूदा संविधान अलोकतांत्रिक है। बिना किसी चुनाव के पदाधिकारियों के रूप में एक मंडली के लोगों को अलोकतांत्रिक रूप से नियुक्त किया गया है। इस तरह की पार्टी संरचनाएं भरोसा बनए रखने में विफल रहती हैं। चुनाव आयोग ने पाया कि 2018 में संशोधित शिवसेना का संविधान भारत के चुनाव आयोग को नहीं दिया गया। 1999 के पार्टी संविधान में लोकतांत्रिक मानदंडों को पेश करने के अधिनियम को संशोधनों ने रद्द कर दिया था, जिसे आयोग के आग्रह पर दिवंगत बालासाहेब ठाकरे द्वारा लाया गया था। आयोग ने यह भी कहा कि शिवसेना के मूल संविधान के अलोकतांत्रिक मानदंड, जिन्हें 1999 में आयोग द्वारा स्वीकार नहीं किया गया था, उनको गोपनीय तरीके से वापस लाया गया, जिससे पार्टी एक निजी संपत्ति के समान समझी जा सकती है ।

आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को लोकतांत्रिक लोकाचार और पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र के सिद्धांतों को प्रतिबिंबित करने और नियमित रूप से अपनी संबंधित वेबसाइटों पर अपनी पार्टी के आंतरिक कामकाज के पहलुओं का खुलासा करने की भी सलाह दी, जैसे कि संगठनात्मक विवरण, चुनाव आयोजित करना, पदाधिकारियों की सूची और संविधान की प्रति ।
राजनीतिक दलों के संविधान में पदाधिकारियों के पदों के लिए स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव और आंतरिक विवादों के समाधान के लिए एक और स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रक्रिया का प्रावधान होना चाहिए।

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